आपके जीवन में क्या क्या करते हैं #नौग्रह

#क्या करते हैं नौ ग्रह
नवग्रहों का असर मानव शरीर से लेकर सम्पूर्ण जीवन पर पड़ता है। कुशल ज्योतिषी मनुष्य के शरीर को देखकर ही समझ जाते हैं ,कि इस व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रह किन किन भावों में बैठे हैं,क्योंकि ग्रहों की अनुकूलता और प्रतिकूलता मानव शरीर की बनावट को दर्शाता है। नवग्रह शरीर के अंगों के भी कारक होते हैं,जब कोई ग्रह अरिष्ट होता है ,तो उसके अंगों में रोग होता है यदि उस ग्रह का उपचार कर दिया जाय तो रोग ठीक हो सकता है। उदहारण के तौर पर शुक्र ग्रह मनुष्य के प्रजनन सन्स्थान का कारक होता है। यदि शुक्र ग्रह प्रतिकूल होगा ,तो प्रजनन सन्स्थान के रोग होंगे। पुरुषों में पेशाब रोग ,प्रमेह, धातु पतन ,मधु मेह ,शुक्राणुनिल आदि रोग होते हैं। वहीँ महिलाओं में गर्भाशय के रोग ,रक्तस्राव ,लिकोरिया एवं समस्त पेशाब रोग होते हैं।
इसी प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षण के लिए कोई न कोई ग्रह जिम्मेदार होते हैं। ग्रहों के अनुकूल होने से जो उपलब्धियां होती हैं ,प्रतिकूल होने पर वही नुक्सान होने लगते हैं।
#ग्रहों का जीवन में प्रभाव
#सूर्य :- सामाजिक मान सम्मान ,सरकारी कार्य ,शरीर में रक्त संचरण चर्म रोग आदि।
#चन्द्रमा :- मन में शांति ,अशांति ,कल्पना शक्ति ,संवेदनात्मक प्रभाव आदि।
#मंगल :- भूमि ,भवन ,स्थायी सम्पति ,रक्तपात ,लड़ाई ,दुर्घटना ,हड्डी टूटना जुड़ना ,ऑपरेशन ,साहस आदि।
#बुध :- व्यापर ,पाचन सन्स्थान ,पुत्री का कारक ,प्रेम सम्बन्ध ,संकट आदि।
#गुरु :- बुद्धि समबन्धी सभी कार्य,धर्म कार्य ,सम्मानित पद की प्राप्ति ,सामाजिक प्रतिष्ठा ,अयाचिक धन प्राप्ति ,देव अनुग्रह ,पिता का सहयोग ,आई ए एस ,पी सी एस जैसे उच्च पदों की प्राप्ति।
#शुक्र :- सौंदर्य ,स्त्री लोलुपता ,व्यवस्थाबुद्धि ,कूटनीति ,मधु मेह आदिरोग,परिवार संकट आदि।
#शनि :- लोहा ,तेल, कोयला,आदि। शनि समस्त कार्यों को भाग्य के हाथो सौंप देता है। शनि की अनुकूलता में अयाचित सफलता एवं प्रतिकूलता में असंभावित असफलता मिलती है।
#राहु ,#केतु :- भौतिक ग्रह हैं इसलिए इनका प्रभाव शरीर में सूक्ष्म रक्त संचरण एवं मन पर ही होता है। मन पर चन्द्रमा का नकारात्मक प्रभाव जहाँ पानुषय को पागल बनता है ,वहीं राहु का प्रभाव मनुष्य की सोच को उल्टा कर देता है। जिससे मनुष्य का विस्वास अपने शरीर ,साधन ,व्यक्ति और परिवार सबसे हट जाता है।
मनुष्य जीवन में काल शर्प जैसा योग केवल राहु एवं केतु के कारण बनता है जो विकास में बहुत बाधक होता है। जिन्हे ऊँची उड़ाने भरनी हों उन्हें राहु, केतु की अनुकूलता अत्यंत आवश्यक होती है। राहु का काम है मन को उचाई तक ले जानाऔर अनकूल न होने पर नीचे गिरा देना। देखने में आता है आज अधिकारी बने कल जेल गए, आज मंत्री बने कल जेल गए आई एस ,पी सी एस आदि की परीक्षाएं दी और एक ,दो नंबर से फेल हो गए ,इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि इन ग्रहों को अनुकूल बनाने का उपचार करके ही आगे बढ़ा जाय। राम शंकर मिश्र

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