कहSS! जवन कहै के बा

मन कै टीस हिया कै पीर

नगर-डगर के लागल तीर

मन के दरद महै के बा।

कहSS! जवन कहै के बा॥

 

दगहिल काहें बाS चुनरिया

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घर अँगने क फ़िरल नजरिया

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सभ अनकहल सहै के बा।

कहSS! जवन कहै के बा॥

 

घर बहरा में मिली ताना

छाहें नाही रखी जमाना

अब अनमने रहै के बा।

कहSS! जवन कहै के बा॥

 

फाँफर चचरा उमिर क बोझ

हमरी खातिर केहु न सोझ

आँखिन लोर बहै के बा।

कहSS! जवन कहै के बा॥

 

चर-अचर के लमहर चकरी

समय त काटS बइठी कगरी

सबुर के फल गहै के बा।

कहSS! जवन कहै के बा॥

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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