मानव जीवन पर नौ ग्रहों का प्रभाव

मानव जीवन पर नौ ग्रहों का प्रभाव

मानव जीवन नव ग्रहों का खिलौना है ,मानव शरीर से लेकर धरती का हर कण नव ग्रहों से प्रभावित होता है। मानव शरीर का अंग किसी न किसी ग्रह से प्रभावित है ,जीवन के समय का प्रत्येक हिस्सा किसी न किसी ग्रह से संचालित होता है,ग्रहों का जीवन पर एवं पृथ्वी पर इतना अधिक प्रभाव होता है कि सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का पृथ्वी पर रिफ्लेक्शन करने वाला चन्द्रमा ग्रह समुद्र को उथल पुथल कर…

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संकट मोचक हनुमान जी की सर्वोच्च मूर्ति की स्थापना के लिए अपील

संकट मोचक हनुमान जी की सर्वोच्च मूर्ति की स्थापना के लिए अपील

भारत वर्ष में निवास करने वाले सभी भारत वासियों भगवत भक्तों, हनुमत भक्तों से श्री संकट मोचक हनुमान जी की सर्वोच्च मूर्ति की स्थापना के लिए अपील: श्री संकटमोचक हनुमान जी की बहुत बड़ी विकराल मूर्ति के ध्यान का लाभ गोस्वामी तुलसीदास जी के शब्दों में हनुमान बाहुक सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु । भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।। गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव । जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।। कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित…

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अयोध्या के चारों ओर 125 किमी. तक के इलाके को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने के लिए कार्य योजना

अयोध्या के चारों ओर 125 किमी. तक के इलाके को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने के लिए कार्य योजना

विश्वकुंडलिनी जागरण संस्थान द्वारा अयोध्या के चारों ओर 125 किमी. तक के इलाके को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने के लिए कार्य योजना। १. प्रत्येक ग्रामपंचायतों में आध्यात्मिक संस्कृति विश्तार शाखाओं और समितियों का गठन। २. प्रत्येक ग्रामपंचायत में योगा केंद्र, संस्कार केंद्र, औषधिवाटिका, नवग्रह वाटिका सम्प्रदाय वाटिका की स्थापना करना। ३. प्रत्येक ग्रामपंचायत में नैतिक युवा पीढ़ी के निर्माण के लिए गीता , रामायण, सत्संग आयोजित करना. ४. युवाओं को आध्यात्म से जोड़ने के लिए गीता…

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अयोध्या के 125 किमी. परिक्षेत्र को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने की अपील

अयोध्या के 125 किमी. परिक्षेत्र को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने की अपील

अयोध्या के 125 किमी. परिक्षेत्र को आध्यात्मिक क्षेत्र बनाने के लिए विश्वकुंडलिनी जागरण संस्थान (अवध क्षेत्र ) क्षेत्र के श्रद्धेय संतो, आदरणीय संभ्रांतजनों , सम्माननीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, पूजीपतियों , विभिन्न संगठनों से अपील , भाइयों / बहनों, समय बहुत तेजी से बदल रहा है सरकार बड़ी तेजी से इंडिया का डिजिटलाइजेक्शन कर जाहि है। भारतीय वैज्ञानिक चन्द्रमा जैसे अन्य ग्रहों में अपना स्थान बना रहे हैं वैज्ञानिक जितनी तेजी से…

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विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

 जब तुम्हारा मन टूटने लगे, तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कहीं न कहीं से उदय होगी और तुम डूबने न पाओगे, पार लगोगे। चरित्र मानव- जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्पदा है। यही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख- शान्ति और मान- सम्मान की अनुकूल दिशा अथवा दुःख- दारिद्र्य तथा अशांति, असन्तोष की प्रतिकूल दिशा में गतिमान होता है। जिसने अपने चरित्र का निर्माण आदर्श रूप में कर लिया उसने…

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विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

 जब तुम्हारा मन टूटने लगे, तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कहीं न कहीं से उदय होगी और तुम डूबने न पाओगे, पार लगोगे। चरित्र मानव- जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्पदा है। यही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख- शान्ति और मान- सम्मान की अनुकूल दिशा अथवा दुःख- दारिद्र्य तथा अशांति, असन्तोष की प्रतिकूल दिशा में गतिमान होता है। जिसने अपने चरित्र का निर्माण आदर्श रूप में कर लिया उसने…

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सकारात्मक विचार

सकारात्मक विचार

सकारात्मक विचार जीवन का आधारभूत मर्म है। इस मर्म में अनेक तथ्य सन्निहित हैं, जिनके प्रकटीकरण से जीवन सुरभित, सुगंधित एवं सौंदर्य से अभिमंडित हो जाता है। सकारात्मक विचार सौंदर्य का प्रतीक एवं पर्याय बन जाता है। यह जीवन को ऊर्जा से भर देता है। ऊर्जा से भरा हुआ जीवन अपने चरम पर विकसित होता है, अनेकों अनेक गुप्त एवं सुप्त आयाम खुलते हैं, जिनके कारण जीवन आशा, उत्साह, उमंग एवं उपलब्धियों से भर जाता…

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योग क्या है ?

योग क्या है ?

गीता में योग की परिभाषा योगःकर्मसु कौशलम् (2-50) की गयी है । दूसरी परिभाषा समत्वं योग उच्यते(2-48) है । कर्म की कुशलता और समता को इन परिभाषाओं में योग बताया गया है । पातंजलि योग दर्शन में योगश्चिय वृत्ति निरोधः (1-1) चित्त की वृत्तियों के निरोध को योग कहा गया है । इन परिभाषाओं पर विचार करने से योग कोई ऐसी रहस्यमय या अतिवादी वस्तु नही रह जाती कि जिसका उपयोग सवर्साधारण द्वारा न हो…

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कौन हो युवाओं का आदर्श ?

कौन हो युवाओं का आदर्श ?

युवा आदर्श कौन? इस सवाल के सबके अपने- अपने जवाब हैं। फिर भी सही जवाब गायब है। यूँ कहने को तो युवक- युवतियों ने किसी न किसी फिल्मी सितारे, क्रिकेटर, फुटबाल या किसी टेनिस खिलाड़ी को अपना आदर्श बना रखा है। इनमें से किसी की वेश- भूषा उनके दिलों को छूती है, तो किसी की चाल- ढाल या हाव- भाव उन्हें भाते हैं। किसी के रन बनाने अथवा फिर किसी की फुटबाल के साथ कलाबाजी…

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