विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

 जब तुम्हारा मन टूटने लगे, तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कहीं न कहीं से उदय होगी और तुम डूबने न पाओगे, पार लगोगे। चरित्र मानव- जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्पदा है। यही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख- शान्ति और मान- सम्मान की अनुकूल दिशा अथवा दुःख- दारिद्र्य तथा अशांति, असन्तोष की प्रतिकूल दिशा में गतिमान होता है। जिसने अपने चरित्र का निर्माण आदर्श रूप में कर लिया उसने…

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सद्विचारों का निर्माण सत् अध्ययन- सत्संग से

सद्विचारों का निर्माण सत् अध्ययन- सत्संग से

कोई सद्विचार तभी तक सद्विचार हैं जब तक उसका आधार सदाशयता है, अन्यथा वह असद्विचारों के साथ ही गिना जायेगा। चूँकि मनुष्य के जीवन में हर प्रकार और हर कोटि के असद्विचार विष की तरह ही त्याज्य हैं, उन्हें त्याग देने में ही कुशल, क्षेम, कल्याण तथा मंगल है। वे सारे विचार जिनके पीछे दूसरों और अपनी आत्मा का हित सन्निहित हो सद्विचार ही होते हैं। सेवा एक सद्विचार है। जीवमात्र की निःस्वार्थ सेवा करने…

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कौन हो युवाओं का आदर्श ?

कौन हो युवाओं का आदर्श ?

युवा आदर्श कौन? इस सवाल के सबके अपने- अपने जवाब हैं। फिर भी सही जवाब गायब है। यूँ कहने को तो युवक- युवतियों ने किसी न किसी फिल्मी सितारे, क्रिकेटर, फुटबाल या किसी टेनिस खिलाड़ी को अपना आदर्श बना रखा है। इनमें से किसी की वेश- भूषा उनके दिलों को छूती है, तो किसी की चाल- ढाल या हाव- भाव उन्हें भाते हैं। किसी के रन बनाने अथवा फिर किसी की फुटबाल के साथ कलाबाजी…

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ऐसे करेंआत्मसमीक्षा

ऐसे करेंआत्मसमीक्षा

आत्म-समीक्षा (आत्मसमीक्षा ) के चार मानक हैं: – अंगों (इन्द्रियसंयम) के आत्म-संयम। समय के आत्म-संयम। पैसे की आत्म-संयम। विचारों का आत्म-संयम। यह जांच की जानी चाहिए है कि वहाँ इन मजबूरी.जीभ से किसी के संबंध में कोई उल्लंघन नहीं मना सामग्री खाने के लिए और असभ्य भाषा लैंगिकता बात करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, कामुकता को टाला जा सकता है। अंगों के आत्म संयम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए…

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