76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ था। और हम आजाद हो गए थे। इसीलिए 15 अगस्त हम हर साल आजादी का पर्व मानते हैं। इस बार हमारी हमारी आजादी के 75 साल पूरे हो गए और हम ७६वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस लिए यह बहुत खास है। इस बार स्वतंत्रता दिवस को बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने…

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सब कुछ करता तू ही

सब कुछ करता तू ही

सब कुछ करता तू ही एक बार मेरी धर्मपत्नी बहुत गम्भीर रूप से बीमार हो गईं। उन्हें दमा की बोमारी थी । हालत इतनी खराब थी कि पानी में हाथ डालना भी मुश्किल था। कोई भी काम अपने हाथ से नहीं कर पातीं। केवल हम दो व्यक्तियों के परिवार में घर के काम-काज के लिए दो लड़कियों को रखना पड़ा। अपनी दोनों बेटियों का विवाह हो चुका था। वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को छोड़कर…

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नकारात्मक चिंतन से बचिए

नकारात्मक चिंतन से बचिए

दैविक प्रकोप, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, मृत्यु, शारीरिक कष्ट, आक्रांताओं के अत्याचार, जीवन की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति न होना आदि ऐसे कारण हो सकते हैं, जो हमारी सीमा से बाहर हैं । जिनमें साधारण मनुष्य का वश नहीं चलता । *किंतु ये कारण ऐसे नहीं हैं, जो हमेशा ही जीवन में बने रहें ।* कभी-कभार ही ऐसे दुःख भरे कारण उपस्थित होते हैं । किंतु सामान्यतः तो व्यक्ति अपनी विचार करने की *”Negative”* नकारात्मक शैली के…

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राष्ट्र कुण्डलिनी

राष्ट्र कुण्डलिनी

सृजन ही प्रकृति की नियति है और नित नया रूप देखना मानव का स्वभाव। समय की गति के साथ हर एक पदार्थ का रूपांतरण होकर नए कलेवर के रूप में बदलता रहता है यदि यंहा पर किसी का अवसान दीखता है तो वह भी नए रूप में प्रस्तुत होने के लिए। भारतीय दर्शन के अनुसार परमात्मा ने सबसे पहले प्राण शक्ति स्वरुप ॐ को प्रकट किया। उससे प्रकाश-ज्ञान का सृजन हुआ। उसी से सृष्टि में…

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रंगभूमि और आज का यथार्थ

रंगभूमि और आज का यथार्थ

कालजयी साहित्य पुरुष कथाकार प्रेमचंद जी का वह साहित्य जिसने अपने समय में हर पढ़ने वालों में स्वतत्रता की आग पैदा कर दी थी। जिसे समझकर हर व्यक्ति के मन में उन परिस्थियों से लड़ने का भाव पैदा हो गया था। आज उन्ही में से ‘रंग भूमि’ उपन्यास विवादों में है। जिसको पढ़ कर आज के तथा कथित मार्डन लोग यह कहते हैं कि इसमें तो दुःख ही दुःख है , तथा इसके द्वारा प्रेमचंद…

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गुरु पूर्णिमा विशेष : जानिए गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के बारे में सब कुछ

गुरु पूर्णिमा विशेष : जानिए गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के बारे में सब कुछ

परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य – इतिहास में कभी- कभी ऐसा होता है कि अवतारी सत्ता एक साथ बहुआयामी रूपों में प्रकट होती है एवं करोड़ों ही नहीं, पूरी वसुधा के उद्धार- चेतनात्मक धरातल पर सबके मनों का नये सिरे से निर्माण करने आती है ।। परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य को एक ऐसी ही सत्ता के रूप में देखा जा सकता है, जो युगों- युगों में गुरु एवं अवतारी सत्ता…

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विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

 जब तुम्हारा मन टूटने लगे, तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कहीं न कहीं से उदय होगी और तुम डूबने न पाओगे, पार लगोगे। चरित्र मानव- जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्पदा है। यही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख- शान्ति और मान- सम्मान की अनुकूल दिशा अथवा दुःख- दारिद्र्य तथा अशांति, असन्तोष की प्रतिकूल दिशा में गतिमान होता है। जिसने अपने चरित्र का निर्माण आदर्श रूप में कर लिया उसने…

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सद्विचारों का निर्माण सत् अध्ययन- सत्संग से

सद्विचारों का निर्माण सत् अध्ययन- सत्संग से

कोई सद्विचार तभी तक सद्विचार हैं जब तक उसका आधार सदाशयता है, अन्यथा वह असद्विचारों के साथ ही गिना जायेगा। चूँकि मनुष्य के जीवन में हर प्रकार और हर कोटि के असद्विचार विष की तरह ही त्याज्य हैं, उन्हें त्याग देने में ही कुशल, क्षेम, कल्याण तथा मंगल है। वे सारे विचार जिनके पीछे दूसरों और अपनी आत्मा का हित सन्निहित हो सद्विचार ही होते हैं। सेवा एक सद्विचार है। जीवमात्र की निःस्वार्थ सेवा करने…

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विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं

 जब तुम्हारा मन टूटने लगे, तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कहीं न कहीं से उदय होगी और तुम डूबने न पाओगे, पार लगोगे। चरित्र मानव- जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्पदा है। यही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख- शान्ति और मान- सम्मान की अनुकूल दिशा अथवा दुःख- दारिद्र्य तथा अशांति, असन्तोष की प्रतिकूल दिशा में गतिमान होता है। जिसने अपने चरित्र का निर्माण आदर्श रूप में कर लिया उसने…

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ऐसे करेंआत्मसमीक्षा

ऐसे करेंआत्मसमीक्षा

आत्म-समीक्षा (आत्मसमीक्षा ) के चार मानक हैं: – अंगों (इन्द्रियसंयम) के आत्म-संयम। समय के आत्म-संयम। पैसे की आत्म-संयम। विचारों का आत्म-संयम। यह जांच की जानी चाहिए है कि वहाँ इन मजबूरी.जीभ से किसी के संबंध में कोई उल्लंघन नहीं मना सामग्री खाने के लिए और असभ्य भाषा लैंगिकता बात करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, कामुकता को टाला जा सकता है। अंगों के आत्म संयम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए…

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