अपने तो अपने होते हैं

अपने तो अपने होते हैं

मनुष्य को जीवन में खुशी , राहत एवं चाहत अपनों से मिलती है। अपने तो अपने होते हैं चाहे वह घर परिवार के हो चाहे न हो।जो आपसे अपनत्व रखे वहीं अपने होते है इसलिए जीवन में इन अपनो से कभी रूठना नही चाहिए क्योंकि जीवन में मुस्कराहट भी अपनों से ही मिलती है। अपने हंसाते भी है और रूलाते भी हैं। जीवन में कोशिश करें कि किसी को आपसे कोई कष्ट न हो और…

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दुष्प्रवत्तियों के चंगुल में फंसा मनुष्य

दुष्प्रवत्तियों के चंगुल में फंसा मनुष्य

हम सभी इस संसार मे नंगे ही आये है और अंत मे कफन ही साथ जाता है।हम जीवन भर इसी चार गज कफन के लिए के दौडते रहते हैं ।यहाँ तक कि सारे वसूल सिद्धांत तोड़ देते हैं और मानवता से कोसो दूर भाग जाते हैं। न तो कभी अपने को अपनी नजर से देख पाते हैं और न ही कभी खुद को पहचान ही पाते हैं । कमाई की आपा धापी में कभी यह…

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राजा और राजधर्म

राजा और राजधर्म

राजगद्दी पर बैठकर राजधर्म को निभाना सरकार का धर्म होता है। बिना राजधर्म निभाये राजगद्दी पर बैठने वाला रंगे सियार की तरह होता है और समय आने पर जनता विद्रोह करके उसे गद्दी से नीचे उतार देती है।लोकतंत्र में राजनेता ही राजा का स्वरूप होता है और उसकी कैबिनेट के साथ मंत्री राजकाज में सहयोगी होते हैं। राजा की कैबिनेट भी उसी के आचरण के अनुकूल कार्य करती है।जबकि मंत्री एवं सहयोगियों का धर्म होता…

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76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ था। और हम आजाद हो गए थे। इसीलिए 15 अगस्त हम हर साल आजादी का पर्व मानते हैं। इस बार हमारी हमारी आजादी के 75 साल पूरे हो गए और हम ७६वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस लिए यह बहुत खास है। इस बार स्वतंत्रता दिवस को बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने…

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जाति धर्म मायामोह में फंसता मनुष्य

जाति धर्म मायामोह में फंसता मनुष्य

जाति धर्म मायामोह में फंसता मनुष्य . ईश्वर जीव को मनुष्य बनाकर इस धराधाम पर भेजता है वह जीव को हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई बनाकर नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ इंसान बनाकर इस धराधाम पर भेजता है। हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई आदि तो पैदा होने के बाद जीव को बनाया जाता है।जीव जब माँ के उदर से बाहर आता है तो ईश्वर के समान निर्विकार होता है इसीलिए जब बच्चा मुस्कारता है तो कहा जाता…

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मनुष्य जीवन में निरोगी काया का महत्व

मनुष्य जीवन में निरोगी काया का महत्व

मनुष्य जीवन में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो जीवन को धन्य बना देती है और उनके अभाव में जीवन नर्क जैसा बन जाता है। मनुष्य का सबसे बड़ा कीमती तोहफा स्वास्थ्य यानी सेहत होता है क्योंकि निरोगी काया ईश्वर की बहुत बड़ी नियामत होती है जो सौभाग्यशाली को ही मिलती है।रोगी जीवन नर्क जैसी कष्टदायक एवं निरोगी काया स्वर्ग जैसी सुखदायक होती है। इसी तरह मानव जीवन में संतोष सबसे बड़ा धन होता है…

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मनुष्य जीवन में भाग्य की भूमिका एवं महत्व पर विशेष

मनुष्य जीवन में भाग्य की भूमिका एवं महत्व पर विशेष

इस धराधाम पर आने वाले प्रत्येक मनुष्य की भाग्य एक जैसी नहीं होती है बल्कि हर एक मनुष्य की भाग्य अलग- अलग होती है। मनुष्य को अपनी भाग्य के अनुरूप फल मिलता है।भाग्य अनुसार कोई राजसी जीवन तो कोई भीखमंगा जीवन व्यतीत करता है।वैसे तो पत्थर जड़ होता है और इधर उधर पड़ा रहता है।लेकिन वहीं पत्थर जब भाग्य से किसी मंदिर में मूर्ति बनकर पहुँच जाता है तो वह भगवान बन जाता है और…

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हमें नेता नहीं सृजेता चाहिए

हमें नेता नहीं  सृजेता चाहिए

देश एवं समाज को उन्नत बनाने के लिए तथा उसे श्रेष्ठ और समुन्नत मार्ग पर बढ़ाने के लिए विशिष्ट व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, यह गुरुतर भार सामान्य व्यक्ति नहीं संभाल सकता, इसके लिए प्रतिभाशाली नेतृत्व गुण संपन्न महामानव चाहिए वही समाज को अच्छी दिशा दे सकने में समर्थ हो सकता है। “प्रभावशाली नेता केवल मंच संभालने मात्र से कोई नहीं बन जाता उन्हें कुछ कर्तव्य करने होते हैं और कुछ दायित्व भी निभाने होते…

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सावन शिव और सोमवार पर विशेष

सावन शिव और सोमवार पर विशेष

साल के बारह महीनों में सावन का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस महीने में धरती हरी भरी हरियाली से सज धज बिरह एवं मिलन की प्रतीक बन जाती है।यही कारण है कि यह महीना भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है और मान्यता है कि वह पूरे महीने धरती पर विराजमान रहकर भक्तों का कल्याण करते हैं।सावन महीने और उसके चारों सोमवारों के बारे तमाम तरह के प्रसंग प्रचलित हैं। सावन शिव और…

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राष्ट्र कुण्डलिनी

राष्ट्र कुण्डलिनी

सृजन ही प्रकृति की नियति है और नित नया रूप देखना मानव का स्वभाव। समय की गति के साथ हर एक पदार्थ का रूपांतरण होकर नए कलेवर के रूप में बदलता रहता है यदि यंहा पर किसी का अवसान दीखता है तो वह भी नए रूप में प्रस्तुत होने के लिए। भारतीय दर्शन के अनुसार परमात्मा ने सबसे पहले प्राण शक्ति स्वरुप ॐ को प्रकट किया। उससे प्रकाश-ज्ञान का सृजन हुआ। उसी से सृष्टि में…

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