अपने तो अपने होते हैं

अपने तो अपने होते हैं

मनुष्य को जीवन में खुशी , राहत एवं चाहत अपनों से मिलती है। अपने तो अपने होते हैं चाहे वह घर परिवार के हो चाहे न हो।जो आपसे अपनत्व रखे वहीं अपने होते है इसलिए जीवन में इन अपनो से कभी रूठना नही चाहिए क्योंकि जीवन में मुस्कराहट भी अपनों से ही मिलती है। अपने हंसाते भी है और रूलाते भी हैं। जीवन में कोशिश करें कि किसी को आपसे कोई कष्ट न हो और…

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दुष्प्रवत्तियों के चंगुल में फंसा मनुष्य

दुष्प्रवत्तियों के चंगुल में फंसा मनुष्य

हम सभी इस संसार मे नंगे ही आये है और अंत मे कफन ही साथ जाता है।हम जीवन भर इसी चार गज कफन के लिए के दौडते रहते हैं ।यहाँ तक कि सारे वसूल सिद्धांत तोड़ देते हैं और मानवता से कोसो दूर भाग जाते हैं। न तो कभी अपने को अपनी नजर से देख पाते हैं और न ही कभी खुद को पहचान ही पाते हैं । कमाई की आपा धापी में कभी यह…

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राजा और राजधर्म

राजा और राजधर्म

राजगद्दी पर बैठकर राजधर्म को निभाना सरकार का धर्म होता है। बिना राजधर्म निभाये राजगद्दी पर बैठने वाला रंगे सियार की तरह होता है और समय आने पर जनता विद्रोह करके उसे गद्दी से नीचे उतार देती है।लोकतंत्र में राजनेता ही राजा का स्वरूप होता है और उसकी कैबिनेट के साथ मंत्री राजकाज में सहयोगी होते हैं। राजा की कैबिनेट भी उसी के आचरण के अनुकूल कार्य करती है।जबकि मंत्री एवं सहयोगियों का धर्म होता…

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मनुष्य जीवन में उपासना का महत्व

मनुष्य जीवन में उपासना का महत्व

मनुष्य जीवन में “उपासना” का बहुत महत्व होता है ।पूजा पाठ अर्चना और उपासना में बहुत फर्क होता है ।उपासना से अपेक्षाओं व इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती है ।उपासना वासना से रहित प्रेम से परिपूर्ण व सराबोर होती है ।बिना उपासना के आनंद की अनुभूति नहीं होती है और न ही इन्द्रियो को सुख ही मिलता है।उपासना से आत्मा को आनंद मिलता है और मन नियन्त्रित होता है।मन बेलगाम घोड़े की तरह स्वच्छद विचरने…

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76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

76वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया तिरंगा

15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ था। और हम आजाद हो गए थे। इसीलिए 15 अगस्त हम हर साल आजादी का पर्व मानते हैं। इस बार हमारी हमारी आजादी के 75 साल पूरे हो गए और हम ७६वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस लिए यह बहुत खास है। इस बार स्वतंत्रता दिवस को बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने…

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पं श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन अखण्ड दीपक

पं श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन अखण्ड दीपक

पं श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन अखण्ड दीपक . अखण्ड दीपक मैंने जलाया और अखण्ड दीपक के सामने बैठा रहा, गायत्री मंत्र का जप करता रहा और भावविभोर साँप जैसे लहराते हैं, ऐसे ही मैं लहराता रहा और मैं अपने आपसे पूछता रहा कि ‘‘दीपक के तरीके से तू जल सकता है, दूसरों को रोशनी देने के लिये’’। छदाम का दीपक, कानी कौड़ी का तेल, एक कानी कौड़ी का इसमें रूई, इन सबको मिलाकर के…

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मनुष्य जीवन में प्रकाश रूपी ज्ञान

मनुष्य जीवन में प्रकाश रूपी ज्ञान

मनुष्य जीवन में प्रकाश रूपी ज्ञान . मनुष्य जीवन प्रकाशमय होना जरूरी होता है क्योंकि मानव जीवन में अन्धेरा मानव जीवन की सबसे बड़ी विफलता होती है।जिस तरह अंधेरा दूर करने के लिए रोशनी जरूरी है उसी तरह मनुष्य जीवन को प्रकाशवान बनाने के लिये ज्ञान के प्रकाश की आवश्यकता होती है।ज्ञान की प्राप्ति के लिये अच्छे ज्ञानवान संत महात्माओ व सुसंस्कारित लोगों के साथ बैठकर उनसे शिक्षा दीक्षा लेना आवश्यक होता है। ज्ञान का…

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हमें नेता नहीं सृजेता चाहिए

हमें नेता नहीं  सृजेता चाहिए

देश एवं समाज को उन्नत बनाने के लिए तथा उसे श्रेष्ठ और समुन्नत मार्ग पर बढ़ाने के लिए विशिष्ट व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, यह गुरुतर भार सामान्य व्यक्ति नहीं संभाल सकता, इसके लिए प्रतिभाशाली नेतृत्व गुण संपन्न महामानव चाहिए वही समाज को अच्छी दिशा दे सकने में समर्थ हो सकता है। “प्रभावशाली नेता केवल मंच संभालने मात्र से कोई नहीं बन जाता उन्हें कुछ कर्तव्य करने होते हैं और कुछ दायित्व भी निभाने होते…

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कार्य की समृद्ध फसल (कर्म)

कार्य की समृद्ध फसल (कर्म)

मानव जीवन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां कर्म बोए जाते हैं और उनके अच्छे या बुरे फल काटे जाते हैं। जो अच्छे कर्म करता है, उसे अच्छा फल मिलता है। बुरे कर्म करने वाले को बुरे फल मिलते हैं। यह कहा जाता है। “जो आम बोएगा, वह आम खाएगा, जो बबूल बोएगा, उसे काँटे मिलेंगे।” जिस प्रकार बबूल की बुवाई से आम प्राप्त करना प्रकृति में संभव नहीं है, उसी प्रकार बुराइयों के बीज बोने…

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राष्ट्र कुण्डलिनी

राष्ट्र कुण्डलिनी

सृजन ही प्रकृति की नियति है और नित नया रूप देखना मानव का स्वभाव। समय की गति के साथ हर एक पदार्थ का रूपांतरण होकर नए कलेवर के रूप में बदलता रहता है यदि यंहा पर किसी का अवसान दीखता है तो वह भी नए रूप में प्रस्तुत होने के लिए। भारतीय दर्शन के अनुसार परमात्मा ने सबसे पहले प्राण शक्ति स्वरुप ॐ को प्रकट किया। उससे प्रकाश-ज्ञान का सृजन हुआ। उसी से सृष्टि में…

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